भ्रष्टाचार पर वार: ग्राम पंचायत फतेहपुर के विकास कार्यों की खुलेगी पोल, राज्य सूचना आयोग ने सचिव को किया तलब



सिद्धार्थनगर / बस्ती मण्डल न्यूज़।

जनपद सिद्धार्थनगर के विकासखंड डुमरियागंज अंतर्गत ग्राम पंचायत फतेहपुर में पिछले 5 वर्षों में हुए विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमिताओं और भ्रष्टाचार की बू आ रही है। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाओं को दबाने और पारदर्शिता छिपाने के मामले को राज्य सूचना आयोग (RTI) ने बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित जन सूचना अधिकारी/ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) और प्रथम अपीलीय अधिकारी को नोटिस जारी कर लखनऊ तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
बस्ती मण्डल न्यूज के पत्रकार/आरटीआई कार्यकर्ता गोविन्द कुमार ने दिनांक 28 फरवरी 2026 को ऑनलाइन आरटीआई के माध्यम से ग्राम पंचायत फतेहपुर में वर्ष 2021 से 2026 के बीच हुए समस्त निर्माण कार्यों, 1 लाख से अधिक के टेंडरों, मूल जीएसटी बिलों, कैश बुक, स्टॉक रजिस्टर और वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट की प्रमाणित छायाप्रति मांगी थी।
सूचना दबाने का आरोप, अफसरों ने साधी चुप्पी
नियमतः 30 दिनों के भीतर सूचना मिल जानी चाहिए थी, लेकिन सरकारी धन के दुरुपयोग को छिपाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो आरटीआई का कोई जवाब दिया और न ही प्रथम अपील पर कोई कार्रवाई की। अधिकारियों की इस मनमानी और तानाशाही के खिलाफ आवेदक ने राज्य सूचना आयोग, लखनऊ का दरवाजा खटखटाया।


11 अगस्त को लखनऊ में होगी आमने-सामने सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के माननीय राज्य सूचना आयुक्त (सुनवाई कक्ष संख्या एस-10) ने केस संख्या 510/A/1238/2026 के तहत दोनों पक्षों को कड़ा नोटिस जारी किया है। आयोग ने 11 अगस्त 2026 को सुबह 10:30 बजे दोनों पक्षों को साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है।
लगेगा ₹25,000 का जुर्माना?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि सुनवाई के दौरान जन सूचना अधिकारी सूचना न देने का कोई ठोस कारण नहीं बता पाते हैं, तो आरटीआई कानून की धारा 20(1) के तहत उन पर ₹250 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम ₹25,000 का निजी जुर्माना लग सकता है और उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो सकती है। इस नोटिस के बाद से ही पंचायती राज विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।


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