संतकबीर नगर। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए जिलाधिकारी ने मनरेगा योजना में बड़ी धांधली पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की है। खलीलाबाद विकास खंड की ग्राम पंचायत तामा में स्वीकृत परियोजना की जगह दूसरी जगह काम कराने और मजदूरों का पैसा डकारने के मामले में प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक (TA) और रोजगार सेवक से वसूली के आदेश दिए गए हैं।
स्वीकृत योजना को ठेंगे पर रख, दूसरी जगह कराई खुदाई
मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जयकेश त्रिपाठी के अनुसार, ग्राम पंचायत तामा (तामेश्वरनाथ) में मनरेगा के तहत 'झझवा तालाब' के तीसरे भाग की खुदाई का काम पास हुआ था। लेकिन जिम्मेदारों ने नियमों को ताक पर रखकर किसी दूसरी (अस्वीकृत) जगह पर काम करा दिया। यह खेल 09 जुलाई से 24 जुलाई 2025 के बीच चला, जिसमें 45 श्रमिकों को काम पर तैनात दिखाया गया था।
मजदूरों का पैसा डकारने की थी साजिश?
जांच में सामने आया कि रोजगार सेवक रंजीता गोस्वामी, प्रधान अंजू पासवान और सचिव अमरनाथ गुप्ता ने कागजों पर मस्टर रोल भरकर उपस्थिति तो दर्ज की, लेकिन खेल तब बिगड़ा जब तकनीकी सहायक रज्जन कुमार श्रीवास्तव द्वारा 1 लाख 40 हजार 112 रुपये का मापांकन किए जाने के बाद भी मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ। विकास खंड स्तर से बिना किसी ठोस वजह के वेजलिस्ट को डिलीट कर दिया गया, जिससे गरीब मजदूरों की मजदूरी फंस गई।
DM का कड़ा रुख: बीडीओ को चेतावनी, सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि
मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं:
- वसूली: आरोपी प्रधान, सचिव, टीए और रोजगार सेवक से गबन की गई राशि वसूल कर मजदूरों को भुगतान किया जाएगा।
- सजा: तत्कालीन खंड विकास अधिकारी (BDO) को शिथिलता के लिए चेतावनी जारी की गई है।
- सचिव पर गाज: ग्राम पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का आदेश दिया गया है।
- TA पर रोक: तकनीकी सहायक अग्रिम आदेश तक किसी भी परियोजना की नाप (Measurement) नहीं कर पाएंगे।
भ्रष्टाचार पर कड़ा संदेश
इस कार्रवाई से जिले के अन्य विकास खंडों में भी हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग और मजदूरों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

0 टिप्पणियाँ