बस्ती मंडल न्यूज डेस्क | सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर जिले में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं का मामला गरमाता जा रहा है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों और जांच टीम गठित करने के आदेश के 13 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक धरातल पर जांच शुरू नहीं हो सकी है। प्रशासनिक सुस्ती के चलते अब शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
इन 6 पंचायतों पर है भ्रष्टाचार का आरोप
शिकायतकर्ता अंकित सिंह द्वारा सौंपे गए साक्ष्यों के अनुसार, नौगढ़ और शोहरतगढ़ विकासखंड की निम्नलिखित पंचायतों में वर्ष 2022 से 2026 के बीच भारी अनियमितताएं बरती गई हैं:
- रामगढ़, हरदासपुर, टेड़िया, सेमरियाव, रसूलपुर और रामपुर।
स्ट्रीट लाइट और बेंच के नाम पर 'बंदरबांट'
शिकायत में दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं:
- महंगी स्ट्रीट लाइट: रामगढ़ पंचायत में जनवरी 2025-26 के दौरान स्ट्रीट लाइट के नाम पर ₹3,36,777 का भुगतान हुआ। आरोप है कि जो लाइट बाजार में ₹600-1200 की है, उसे ₹3,871 की दर से खरीदा दिखाया गया।
- कागजी विकास: टेड़िया पंचायत में मार्च माह में 20 लाख रुपये से अधिक का भुगतान पोर्टल पर दर्ज है, लेकिन मौके पर कार्य न होने का दावा किया गया है।
- आरसीसी बेंच और डस्टबिन: सेमरियाव, रसूलपुर और रामपुर में डस्टबिन और बेंच के नाम पर बाजार दर से कई गुना अधिक भुगतान कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है।
फाइलों में उलझी जांच, उठ रहे सवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए थे। लेकिन 13 दिन बाद भी जांच शुरू न होने पर डीपीआरओ वाचस्पति झा की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि फाइल सीडीओ के पास भेजी गई है, जबकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि साक्ष्यों को मिटाया जा सके।
अधिकारियों और प्रतिनिधियों की मिलीभगत का आरोप
शिकायत में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, जेई और खंड विकास अधिकारी सहित पंचायती राज विभाग के उच्चाधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक ही कार्य को बार-बार दिखाकर सरकारी धन की निकासी की गई है।

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