सिद्धार्थनगर में पुलिस और कांग्रेसियों के बीच हुई 'पुतला रेस'

 


सिद्धार्थनगर | बस्ती मण्डल न्यूज़: जनपद के साड़ी तिराहे पर शुक्रवार को राजनीति और खेल का ऐसा अनोखा संगम देखने को मिला कि राहगीर भी अपनी गाड़ी रोककर तालियां बजाने लगे। यहाँ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच किसी 'पकड़म-पकड़ाई' के खेल जैसा नजारा दिखा, जहाँ पुतला तो नहीं जला, लेकिन पुलिसकर्मियों और नेताओं की अच्छी-खासी 'कार्डियो एक्सरसाइज' हो गई।

क्या है पूरा माजरा?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस के बड़े नेताओं पर की गई टिप्पणी से कांग्रेसी इतने गरम थे कि वे मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने निकल पड़े। उन्हें लगा कि साड़ी तिराहे पर आग लगेगी, लेकिन पुलिस प्रशासन ने अपनी 'फुर्ती' से पूरी योजना पर पानी फेर दिया।

10 मिनट की 'मैराथन' दौड़:


जैसे ही कांग्रेसियों ने माचिस की तीली निकालने की कोशिश की, पुलिस के जवानों ने 'ओलंपिक स्प्रिंटर' की तरह छलांग लगाई और पुतला छीनकर नौ दो ग्यारह हो गए। फिर क्या था? कांग्रेसी कार्यकर्ता भी अपने लोकतांत्रिक अधिकार (और पुतले) को बचाने के लिए पुलिस के पीछे दौड़ पड़े। करीब 10 मिनट तक तिराहे पर 'पुलिस आगे-आगे, नेता पीछे-पीछे' का खेल चलता रहा। इस भाग-दौड़ में एक कार्यकर्ता तो संतुलन खोकर जमीन पर ऐसे गिरे जैसे क्रिकेट में कोई खिलाड़ी कैच लपकने के लिए डाइव लगाता है।

न पुतला जला, न गुस्सा शांत हुआ:

पुलिस की इस 'स्पोर्ट्समैनशिप' से कांग्रेसी जिलाध्यक्ष काजी सुहेल अहमद काफी खफा नजर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। उधर, पुलिस का तर्क था कि इतने व्यस्त तिराहे पर पुतला जलाना सेहत के लिए ठीक नहीं था, इसलिए उन्होंने समय रहते 'पुतला रेस्क्यू ऑपरेशन' को अंजाम दिया।

नतीजा:

अंत में पुतला तो पुलिस के कब्जे में रहा, लेकिन कार्यकर्ताओं ने गले की पूरी ताकत लगाकर नारेबाजी की। पुतला दहन तो नहीं हुआ, लेकिन इस 'पकड़म-पकड़ाई' का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सिद्धार्थनगर की राजनीति अब इस दौड़ के बाद काफी 'गरमा' गई है।

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