संतकबीर नगर | बस्ती मण्डल न्यूज़: जनपद के हैसर ब्लॉक में बिना टेंडर के एक ही फर्म को करोड़ों रुपये के अवैध भुगतान के मामले में डीपीआरओ कार्यालय की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जांच के दौरान असली दोषियों को बचाने के लिए उन सचिवों पर कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई, जो इस प्रकरण में पूरी तरह निर्दोष थे।
घोटाले की पृष्ठभूमि:
यह पूरा मामला लगभग 7 महीने पहले का है, जब हैसर ब्लॉक की 54 ग्राम पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर एक ही फर्म को करीब 6 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई उच्चस्तरीय जांच में पाया गया कि लाखों की परियोजनाओं पर बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए, केवल फर्जी कोटेशन के आधार पर भुगतान किया गया था।
जांच में हुई 'बड़ी चूक' या सोची-समझी रणनीति?
एडीओ पंचायत की रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले के दौरान केवल 7 सचिवों का कार्यकाल प्रभावी था। इसके बावजूद डीपीआरओ कार्यालय ने 8 सचिवों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेज दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम विकास अधिकारी अरविंद, देश दीपक वर्मा, प्रशांत यादव और ग्राम पंचायत अधिकारी अजीत कुमार शर्मा व विनोद कुमार मिश्र के नाम मुख्य दोषी सूची में न होने के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई की फाइल आगे बढ़ा दी गई।
मामला सामने आने के बाद, डीपीआरओ ने आनन-फानन में निर्दोष सचिवों के नाम हटा दिए और इसे 'त्रुटिवश' हुई गलती बताया। डीपीआरओ कार्यालय की इस कार्रवाई को लेकर ब्लॉक परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।

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