फर्जीवाड़े में राजस्व निरीक्षक निलंबित, डीएम शिवशरणप्पा जीएन की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

 



सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में सरकारी तंत्र के भीतर बैठकर भू-माफियाओं को संरक्षण देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना ली है। तहसील नौगढ़ के राजस्व ग्राम तेतरी में करोड़ों की जमीन को फर्जी तरीके से बिकवाने के गंभीर मामले में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल और वर्तमान राजस्व निरीक्षक अब्दुल गफ्फार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से राजस्व विभाग के गलियारों में हड़कंप व्याप्त है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह मामला सिद्धार्थनगर शहर के सिविल लाइन्स निवासी आरती वर्मा द्वारा 15 मई 2025 को दाखिल किए गए एक शिकायती प्रार्थना पत्र से शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राजस्व ग्राम तेतरी (परगना व तहसील नौगढ़) स्थित गाटा संख्या 367 (रकबा 0.0510 हेक्टेयर) की कीमती जमीन को फर्जी तरीके से किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर बेच दिया गया।

​शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) स्तर से इसकी जांच के आदेश दिए थे। 16 अक्टूबर 2025 को पेश की गई जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसके बाद अब जाकर गाज गिरी है।

​फर्जीवाड़े में राजस्व निरीक्षक की संदिग्ध भूमिका

​जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान राजस्व निरीक्षक अब्दुल गफ्फार (जो उस समय क्षेत्रीय लेखपाल थे) ने पद का दुरुपयोग करते हुए उक्त भूमि को फर्जी तरीके से बिकवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरोप है कि यह जमीन वास्तव में घनश्याम पुत्र छोटेलाल की नहीं थी, फिर भी कागजों में हेराफेरी कर इसे बिकवा दिया गया। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने उन्हें निलंबित करने का कड़ा आदेश जारी किया।

​"अनियमितता बर्दाश्त नहीं" - प्रशासन का कड़ा रुख

​जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कामकाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • निलंबन और जांच: अब्दुल गफ्फार को निलंबन अवधि के दौरान केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, बशर्ते वह किसी अन्य व्यवसाय में शामिल न हों।
  • जांच अधिकारी की नियुक्ति: प्रकरण की गहराई से जांच के लिए उपजिलाधिकारी बांसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

​अन्य संलिप्त व्यक्तियों पर भी गिरेगी गाज

​सूत्रों के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा केवल एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है। पुलिस और प्रशासन की टीम अब उन अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिन्होंने इस जमीन की रजिस्ट्री में गवाही दी या फर्जी दस्तावेज तैयार करने में मदद की। संभावना जताई जा रही है कि जांच की आंच कुछ अन्य कर्मचारियों और तथाकथित भू-माफियाओं तक भी पहुँच सकती है।

​'बस्ती मंडल न्यूज़' का प्रभाव

​यह खबर उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद है जिनकी जमीनें भू-माफियाओं द्वारा हड़प ली गई हैं। बस्ती मंडल न्यूज़ लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। हमारा मानना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज का विश्वास कानून से उठने लगता है। जिलाधिकारी की यह कार्रवाई प्रशासन के प्रति जनता के भरोसे को बहाल करने का काम करेगी।

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