बस्ती/अम्बेडकरनगर। टांडा-कलवारी पुल की धीमी मरम्मत ने बस्ती और अम्बेडकरनगर के लाखों लोगों की कमर तोड़ दी है। एनएचएआई (NHAI) द्वारा पिछले साल सितंबर से शुरू किया गया मरम्मत कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके कारण यात्रियों, व्यापारियों और आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। दुद्धी-लुंबिनी हाईवे पर स्थित यह पुल दोनों जिलों के बीच व्यापार और आवागमन की मुख्य कड़ी है।
65 से 70 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर
पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बीते 11 सितंबर से इस पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके बाद से ही रूट डायवर्जन लागू है। वर्तमान में बस्ती से टांडा जाने वाले यात्रियों को बिड़हल घाट पुल के रास्ते घूमकर जाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें करीब 65 से 70 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय और पैसा दोनों की भारी बर्बादी हो रही है।
शादी-ब्याह के सीजन में बढ़ी मुसीबत
लगभग सवा दो किलोमीटर लंबा यह पुल वर्ष 2006 में 1.19 अरब रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ था। वर्तमान में शादियों और धार्मिक आयोजनों का समय चल रहा है, ऐसे में पुल बंद होने से लोगों को गंतव्य तक पहुँचने में पसीने छूट रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत कार्य जिस सुस्त रफ्तार से चल रहा है, उसे देखकर नहीं लगता कि जल्द ही राहत मिलेगी।
व्यापारियों का कारोबार चौपट
टांडा चौक के व्यापारियों ने बताया कि पुल बंद होने का सबसे बुरा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ा है। लाला यादव और जुबेर अहमद जैसे स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पुल पूर्वांचल के एक दर्जन जिलों को जोड़ता है। इसके बंद होने से टांडा और कलवारी के बीच होने वाला करोड़ों का व्यापार ठप पड़ा है।
जनता की मांग: युद्धस्तर पर हो काम
क्षेत्रीय जनता ने सरकार और एनएचएआई के अधिकारियों से मांग की है कि पुल की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर चलाया जाए ताकि कम से कम छोटे वाहनों के लिए रास्ता जल्द खोला जा सके।

0 टिप्पणियाँ