बस्ती मंडल न्यूज़ | संवाददाता: मृत्युंजय शर्मा
अम्बेडकरनगर। जनपद में पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ा हुआ है। शुक्रवार से शुरू हुई रिमझिम बारिश और शनिवार को तेज हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कटाई के लिए तैयार खड़ी गेहूं और सरसों की फसलें खेतों में ही धराशायी हो गई हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
तेज हवाओं ने फसलों को किया जमीनदोज
अम्बेडकरनगर के जलालपुर, कटेहरी, टांडा, आलापुर और भीटी क्षेत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार, बेमौसम बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने पककर तैयार गेहूं की फसल को खेतों में ही बिछा दिया है।
- फसल गिरना: फसल गिरने से दानों के काले पड़ने और बालियों में सड़न पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
- मशीनी कटाई पर रोक: खेतों में नमी और फसल के गिर जाने से अब कंबाइन मशीनों से कटाई करना लगभग असंभव हो गया है, जिससे किसानों पर अब मजदूरी का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
सरसों और आम की फसल को भी भारी चोट
केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि दलहन और तिलहन की फसलों पर भी कुदरत का कहर टूटा है:
- सरसों: जिन किसानों ने सरसों काटकर खेतों में रखी थी, वह भीगने के कारण खराब हो रही है।
- आम की फसल: तेज हवा और ओलों के कारण आम के बौर (मंजर) भारी संख्या में झड़ गए हैं, जिससे बागबानों की उम्मीदें भी टूटती नजर आ रही हैं।
किसानों की आँखों में आंसू: "अब कर्ज कैसे चुकेगा?"
अकबरपुर और जलालपुर क्षेत्र के किसानों का कहना है कि उन्होंने खाद, बीज और सिंचाई के लिए भारी कर्ज लिया था। फसल कटने के ठीक पहले इस बारिश ने उन्हें दाने-दाने को मोहताज कर दिया है। किसानों का दर्द साफ झलक रहा है कि अब साल भर के खाने का इंतजाम और बैंक का कर्ज चुकाना उनके लिए पहाड़ जैसी चुनौती बन गया है।
प्रशासन से मुआवजे की गुहार
बस्ती मंडल न्यूज़ के माध्यम से जनपद के किसानों ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से मांग की है कि:
- राजस्व विभाग की टीमों को तत्काल खेतों में भेजकर नुकसान का सर्वे कराया जाए।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाया जाए।
- प्राकृतिक आपदा के तहत मिलने वाली सहायता राशि का वितरण सुनिश्चित किया जाए।

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