संवाददाता: गोविंद कुमार
स्थान: सिद्धार्थनगर/दिल्ली
सिद्धार्थनगर/दिल्ली। डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने लोकसभा में भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुए समझौते को लेकर सरकार से तीखे सवाल किए। उन्होंने 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुए 'व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते' (TEPA) के जमीनी असर और भविष्य के लक्ष्यों पर स्पष्टीकरण मांगा।
100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियों पर सवाल
सांसद जगदंबिका पाल ने पूछा कि समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश और 10 लाख रोजगार सृजन का जो बड़ा लक्ष्य रखा गया है, उसे प्राप्त करने के लिए सरकार की कार्ययोजना क्या है? उन्होंने वस्त्र, इंजीनियरिंग, रसायन, प्रसंस्कृत खाद्य और आईटी सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों को अब तक मिले वास्तविक लाभ की जानकारी भी मांगी।
काला नमक चावल और GI टैग उत्पादों पर विशेष जोर
क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए सांसद ने काला नमक चावल जैसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग वाले उत्पादों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा:
- क्या काला नमक चावल जैसे पारंपरिक उत्पादों को स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन जैसे देशों में शुल्क छूट मिलेगी?
- इन उत्पादों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार का जवाब: निर्यात को मिलेगा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ
सरकार ने सदन में जवाब देते हुए बताया कि इस समझौते के तहत 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायत दी गई है। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में बड़ी बढ़त मिलेगी। सरकार के अनुसार:
- चावल सहित कई कृषि उत्पादों को टैरिफ छूट का लाभ मिलेगा।
- APEDA के माध्यम से पारंपरिक और GI टैग उत्पादों के प्रचार-प्रसार के प्रयास तेज किए गए हैं।
- बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा के लिए समझौते में कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
लोकसभा में उठाया गया यह मुद्दा दर्शाता है कि अब इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के बड़े दावों की कसौटी जमीनी परिणाम होंगे। निवेश और रोजगार के वादे कितनी जल्दी हकीकत बनते हैं, इस पर क्षेत्र की जनता की भी नजर रहेगी।

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