ब्यूरो रिपोर्ट, बयारा (डुमरियागंज) / सिद्धार्थनगर
25 मई 2026
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। भीषण गर्मी और उमस के बीच जनपद के डुमरियागंज क्षेत्र में बिजली व्यवस्था ने दम तोड़ दिया है। नगर पंचायत और ग्रामीण इलाकों (अंचल क्षेत्रों) में पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। दिन हो या रात, अघोषित कटौती और गंभीर लो-वोल्टेज की समस्या ने स्थानीय उपभोक्ताओं का जीना मुहाल कर दिया है। इस बदइंतजामी के कारण ग्रामीण इलाकों में आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
लो-वोल्टेज का संकट: शोपीस बने बिजली के उपकरण
मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के दर्जनों गांवों में रीवा विद्युत उपकेंद्र से बिजली की आपूर्ति की जाती है। स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें शेड्यूल (रोस्टर) के मुताबिक बिजली का आधा हिस्सा भी नसीब नहीं हो रहा है। बिजली आती भी है, तो वोल्टेज इतना कम होता है कि पंखे, कूलर या अन्य जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण महज शोपीस बनकर रह जाते हैं।
भीषण गर्मी में छतों पर रात बिताने को मजबूर हैं लोग
क्षेत्र के जागरूक उपभोक्ताओं—मकबूल खान, मुनव्वर हुसैन, संजय चौधरी और गुड्डू गौतम ने 'बस्ती मण्डल न्यूज़' से अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि:
"इस उमस भरी जानलेवा गर्मी में बिजली की अघोषित कटौती हमारे लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। दिनभर में दर्जनों बार बिजली आती-जाती है। लोकल फॉल्ट के नाम पर रात-रात भर सप्लाई बंद रहती है, जिससे लोग मजबूरन छतों पर सोने को विवश हैं। ऊपर से मच्छरों का प्रकोप और उमस के कारण लोग रात भर जागकर सुबह कर रहे हैं।"
उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने बैठे हैं और जनता की शिकायतों पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है।
विद्युत एक्सईएन संतोष कुमार त्रिपाठी का पक्ष:
जब 'बस्ती मण्डल न्यूज़' ने इस बिजली संकट को लेकर डुमरियागंज के विद्युत एक्सईएन (XEN) संतोष कुमार त्रिपाठी से बात की, तो उन्होंने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा:
"वर्तमान में मांग बढ़ने के कारण रोस्टर के अनुसार पूरी बिजली की आपूर्ति पीछे से ही नहीं मिल पा रही है। ओवरलोड की स्थिति से निपटने के लिए मजबूरन आपातकालीन (इमरजेंसी) कटौती करनी पड़ रही है। इसके अलावा, अत्यधिक गर्मी के कारण लाइनों में जो लोकल फॉल्ट आ रहे हैं, उन्हें हमारी टीमें तुरंत अटेंड कर ठीक कर रही हैं ताकि आपूर्ति बहाल रखी जा सके।"

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