23 करोड़ का 'जीएसटी स्कैम': विश्वासपात्र ने ही लगाया व्यवसायी को चूना, आईडी-पासवर्ड हैक कर जारी किए करोड़ों के फर्जी बिल



मेंहदावल (संतकबीर नगर)। जनपद के मेंहदावल नगर पंचायत में एक ऐसा वित्तीय फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने डिजिटल सुरक्षा और आपसी विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक स्थानीय व्यवसायी के साथ उसके ही करीबी सहयोगी ने विश्वासघात करते हुए उनके जीएसटी (GST) और इनकम टैक्स लॉगिन का दुरुपयोग कर 23 करोड़ 76 लाख रुपये से अधिक के फर्जी बिल जारी कर दिए। इस सनसनीखेज जालसाजी के खुलासे के बाद मेंहदावल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और करोड़ों के इस खेल की परतों को उखाड़ना शुरू कर दिया है।

​विश्वास की आड़ में रची गई बड़ी साजिश

​पूरा मामला मेंहदावल कस्बे के नौदरी मोहल्ला निवासी व्यवसायी सुजीत गुप्ता से जुड़ा है। सुजीत गुप्ता ने अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के टैक्स और कागजी कार्यों की जिम्मेदारी अर्पित कुमार नामक व्यक्ति को सौंपी थी। सुजीत को अर्पित पर पूरा भरोसा था, इसलिए उन्होंने अपने फर्म के लॉगिन क्रेडेंशियल (आईडी और पासवर्ड) उसे दे रखे थे। लेकिन आरोप है कि अर्पित ने इसी भरोसे का फायदा उठाकर 'एसके इंटरप्राइजेज' के नाम पर एक बड़ा सिंडिकेट खड़ा कर दिया और फर्जी इनवॉइस जारी करने का खेल शुरू कर दिया।

​आंकड़ों का मकड़जाल: 28 करोड़ तक पहुँचा इनवॉइस मूल्य

​पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के करोड़ों रुपये के फर्जी बिक्री बिल जारी किए।

  • कारोबार मूल्य: 23,76,01,103.39 रुपये (तेईस करोड़ छिहत्तर लाख से अधिक)।
  • जीएसटी की चोरी: इन बिलों पर 45,29,048 रुपये का फर्जी जीएसटी दर्शाया गया।
  • कुल इनवॉइस मूल्य: टैक्स मिलाकर यह पूरा फर्जीवाड़ा 28,90,00,151.60 रुपये तक पहुँच गया।

​इस फर्जीवाड़े के कारण वास्तविक व्यवसायी सुजीत गुप्ता अब न केवल भारी आर्थिक बोझ तले दब गए हैं, बल्कि जीएसटी विभाग और आयकर विभाग की कानूनी कार्रवाई के रडार पर भी आ गए हैं।

​पलवल से लेकर दिल्ली तक फैला फर्जीवाड़े का जाल

​जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े के तार कई राज्यों से जुड़े हैं। जिन फर्मों को फर्जी बिल जारी किए गए, उनमें शामिल हैं:

  1. श्री लक्ष्मी इंटरप्राइजेज (पलवल, हरियाणा)
  2. सिंह ट्रेडर्स (दिल्ली)
  3. स्वास्तिक प्रिंट लाइन (दिल्ली)
  4. सुनील ट्रेडर्स (मेंहदावल)

​इसके अलावा, 'न्यू बाबा प्रिंटर्स' और 'टान शुआ वीविंग सेंटर' जैसी फर्मों से फर्जी खरीदारी (Purchase) भी दिखाई गई, जबकि सुजीत गुप्ता का इन फर्मों से कभी कोई वास्तविक लेन-देन ही नहीं हुआ था।

​विभागीय जांच में खुला 'राज', पासवर्ड बदलकर किया गुमराह

​इस महा-फर्जीवाड़े का खुलासा सितंबर 2025 में तब हुआ जब विभागीय जांच शुरू हुई। जब सुजीत गुप्ता ने पोर्टल लॉगिन करने की कोशिश की, तो पता चला कि उनके ई-मेल आईडी और पासवर्ड बदल दिए गए हैं। आरोपी अर्पित ने ओटीपी के माध्यम से पोर्टल पर कब्जा कर लिया था ताकि सुजीत को भनक न लग सके। इतना ही नहीं, 10 सितंबर 2025 को दाखिल किए गए आयकर रिटर्न में भी संदिग्ध आईपी एड्रेस (IP Address) का उपयोग पाया गया है, जो किसी अन्य स्थान से संचालित किया जा रहा था।

​पुलिस की कार्रवाई: आईपी एड्रेस और ओटीपी की होगी पड़ताल

​मेंहदावल थानाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब उन डिवाइसों और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है जिनसे जीएसटी पोर्टल को लॉगिन किया गया था। साथ ही, उन सभी फर्मों के संचालकों से भी पूछताछ की जा सकती है जिनके नाम इन फर्जी बिलों में शामिल हैं।


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