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| खाली पड़ा गैस सलेंडर |
कानपुर / बस्ती: भविष्य संवारने का सपना लेकर बस्ती मंडल से कानपुर गए हजारों छात्रों के लिए आज 'जीवन' और 'करियर' के बीच जंग छिड़ गई है। कानपुर की प्रसिद्ध कोचिंग मंडी काकादेव से जो खबरें आ रही हैं, वे किसी भी माता-पिता की रूह कंपा देने वाली हैं। वहां रह रहे हमारे क्षेत्र के छात्र आज दाने-दाने को तरस रहे हैं।
गैस की किल्लत और 350 रुपये किलो की मार
बस्ती के रहने वाले आदित्य चौरसिया, जो कानपुर के गीतानगर में रहकर बीएससी (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी आपबीती सुनकर आपकी आंखें भर आएंगी। आदित्य ने बताया कि कानपुर में छोटे गैस सिलेंडर की रीफिलिंग 350 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। पैसे होने के बावजूद गैस नहीं मिल रही है। छात्र अब बिना खाना खाए रातें काट रहे हैं।
"आधी रोटी और अधूरी पढ़ाई"
कानपुर के हॉस्टलों में रहने वाले छात्र अब 'घर वापसी' की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन वहां भी एक बड़ी रुकावट है—यूनिवर्सिटी की 75% अटेंडेंस का नियम।
- छात्रों का कहना है कि मेस और टिफिन के दाम 25% से 30% बढ़ गए हैं।
- जो टिफिन पहले ₹2200 में आता था, अब उसके लिए ₹3000 मांगे जा रहे हैं।
- डाइट में कटौती कर दी गई है और तवा रोटी की जगह मैदे वाली तंदूरी रोटी दी जा रही है।
बस्ती मंडल न्यूज़ की विशेष अपील
सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर और बस्ती जिले के हजारों छात्र कानपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। बस्ती मंडल न्यूज़ प्रशासन से यह सवाल पूछता है कि क्या इन होनहारों का भविष्य भूख की भेंट चढ़ जाएगा?
प्रशासन को तुरंत इन इलाकों में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए और मेस संचालकों की मनमानी पर रोक लगानी चाहिए।


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