शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बस्ती में शंखनाद: बोले- धर्म के बिना राष्ट्र का उत्थान नामुमकिन!

 


संवाददाता: रविंद्र भट्ट | बस्ती

बस्ती। जनपद के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में रविवार को 'सनातन धर्म संवाद' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ज्योतिष्मठ पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने शिरकत की। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए धर्म की महत्ता और जीवन में इसके प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।

धर्म ही उन्नति का मार्ग: शंकराचार्य

​अपने संबोधन में शंकराचार्य जी ने स्पष्ट किया कि धर्म के बिना व्यक्ति, समाज या राष्ट्र का कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने कहा, "धर्म वह है जो मनुष्य को ऊंचा उठाता है, जबकि अधर्म पतन का कारण बनता है। यदि किसी को जीवन में वास्तविक प्रगति करनी है, तो उसे अपने आचरण को धर्मानुकूल बनाना ही होगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म को जीवन से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह मानव जीवन की आधारभूत आवश्यकता है।

राष्ट्र की परिभाषा और संस्कृति

​राष्ट्र धर्म पर चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि राष्ट्र केवल एक भौगोलिक सीमा का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवन पद्धति और संस्कृति का प्रतिबिंब है। उन्होंने आह्वान किया कि "राष्ट्र हम हैं और राष्ट्र आप हैं," इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह परम कर्तव्य है कि वह राष्ट्र धर्म का निष्ठापूर्वक पालन करे।

सम्मान और विभूतियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट उपलब्धियों के लिए नियुक्तियां और सम्मान भी दिए गए:

  • ​राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के संस्थापक अलंकार अग्निहोत्री का नाम बदलकर 'धर्मा अलंकार अग्निहोत्री' रखा गया।
  • ​मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा को 'धर्मभूषण' की उपाधि से नवाजा गया।

​इस आध्यात्मिक समागम में चिल्लूपार के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी, कप्तानगंज विधायक कविंद्र उर्फ अतुल चौधरी, प्रशांत पांडेय, भृगुनंदन त्रिपाठी पंकज, संत प्रकाश और लल्लू पांडेय सहित भारी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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