अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही 'गड्ढा मुक्त' सड़कों और 'स्वच्छ भारत' का दम भरती हो, लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ताज़ा मामला कटेहरी विधानसभा क्षेत्र का है, जहाँ सत्ताधारी भाजपा विधायक धर्मराज निषाद का अपना पैतृक गांव दिलावलपुर ही विकास की बाट जोह रहा है।
वीआईपी गांव, पर सुविधाएं शून्य
विधायक का पैतृक गांव होने के नाते दिलावलपुर को आदर्श गांव होना चाहिए था, लेकिन यहाँ की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक का बुरा हाल है। सड़कों पर इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि पैदल चलना भी दूभर है। दुपहिया वाहन चालक आए दिन इन गड्ढों के कारण गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बरसात के समय पूरा रास्ता टापू बन जाता है और कीचड़ की वजह से घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
सड़कों पर बह रहा नालियों का गंदा पानी
सिर्फ सड़कें ही नहीं, बल्कि गांव की जल निकासी व्यवस्था भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नालियां गंदगी से पटी पड़ी हैं और सफाई कर्मचारी महीनों तक नज़र नहीं आते। स्थिति यह है कि नालियों का गंदा और बदबूदार पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे गांव में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश: "सिर्फ चुनाव में दिखते हैं वादे"
स्थानीय ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज स्थिति नारकीय है। ग्रामीणों का कहना है कि:
"जब सत्ताधारी विधायक अपने ही पैतृक गांव की सुध नहीं ले पा रहे, तो बाकी विधानसभा क्षेत्र के विकास के दावों पर भरोसा कैसे किया जाए?"
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस खबर के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या दिलावलपुर के ग्रामीण इसी तरह नरक जैसी स्थिति में रहने को मजबूर रहेंगे।
रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल न्यूज़

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