भेडौहा/बांसी (सिद्धार्थनगर)। जनपद के खेसरहा ब्लॉक अंतर्गत भेडौहा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में रंगों का महापर्व होली पारंपरिक हर्षोल्लास और आपसी सौहार्द के साथ मनाया गया। आधुनिकता के दौर में भी यहाँ की मिट्टी में रची-बसी 'फाग' परंपरा की जीवंत झलक देखने को मिली।
चौपालों पर जमी फाग की महफिल
बुधवार सुबह से ही भेडौहा गांव के मंदिरों और साझा चौपालों पर ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। युवाओं और बुजुर्गों की टोलियों ने हाथ में ढोलक और मंजीरे लेकर पारंपरिक फाग गीत गाए। 'जोगीरा सारा रारारा' के उद्घोष और लोक गीतों की धुन पर ग्रामीण झूमते नजर आए। महिलाओं ने भी मंगल गीतों के साथ एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां साझा कीं।
पुरानी रंजिशें भुलाकर मिले गले
होली के इस पावन अवसर पर ग्रामीणों ने 'मिट्टी की सोंधी खुशबू' और आपसी प्रेम का परिचय दिया। लोगों ने पुराने गिले-शिकवे और आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया। बच्चों में रंग-बिरंगी पिचकारियों को लेकर भारी उत्साह देखा गया। कई स्थानों पर सामूहिक भोज का भी आयोजन हुआ, जहाँ लोगों ने पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया।
शांतिपूर्ण रहा उत्सव
सुरक्षा की दृष्टि से भेडौहा और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल मुस्तैद रहा। शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए इस त्योहार ने सामाजिक समरसता का एक बड़ा संदेश दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का माध्यम है।
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