अम्बेडकरनगर। जिले में न्यायिक हिरासत में अजय कुमार की मौत का मामला अब प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के कड़े रुख के बाद महरुआ थाने में तत्कालीन जेल अधीक्षक, तत्कालीन थानाध्यक्ष और गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
मृतक अजय की मां शिवकुमारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत 28 मार्च 2025 को एक मोबाइल कॉल से हुई थी। आरोप लगा कि अजय ने बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की, जिसका ऑडियो वायरल होने के बाद 29 मार्च को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन जेल जाने के महज 24 घंटे के भीतर ही अजय की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
परिजनों का गंभीर आरोप: "नाक-कान से बह रहा था खून"
परिवार का आरोप है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि पुलिसिया उत्पीड़न का नतीजा है। मां ने बताया कि जब उन्होंने बेटे का शव देखा, तो उसके सिर पर चोट के गहरे निशान थे और नाक-कान से खून निकल रहा था। लंबे समय तक न्याय के लिए भटकने के बाद अब अदालत के हस्तक्षेप पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।
जांच के घेरे में खाकी
अब यह मामला केवल एक मौत की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि हिरासत में सुरक्षा और मानवाधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी।
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