अंबेडकरनगर की ऐतिहासिक तहसील टांडा, जो अपनी 'बुनकरी' और कपड़ों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, आज बिजली की अघोषित कटौती की मार झेल रही है।
समस्या का विस्तार: टांडा के पावरलूम उद्योग की रीढ़ 'बिजली' है। पिछले एक महीने से यहाँ 24 घंटे में मुश्किल से 10-12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। अघोषित कटौती और बार-बार होने वाली ट्रिपिंग के कारण लूम (मशीनें) बंद पड़े हैं। बुनकर मजदूर बेरोजगार हो रहे हैं और मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। लो-वोल्टेज की वजह से मशीनों की मोटर जलने की समस्या भी आम हो गई है।
असर: टांडा का कपड़ा बाजार अपनी चमक खो रहा है। बुनकर यूनियन के नेताओं का कहना है कि यदि बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो बुनकर पलायन करने को मजबूर होंगे। सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना टांडा में बिजली के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही है।
0 टिप्पणियाँ