संतकबीरनगर की धनघटा तहसील, जो कि काफी हद तक बाढ़ प्रभावित और पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है, यहाँ की सबसे बड़ी समस्या 'स्वास्थ्य सेवा' है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) धनघटा में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को राम भरोसे छोड़ दिया गया है।
समस्या का विस्तार: यहाँ इमरजेंसी के समय कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होता। रात में यदि कोई दुर्घटना हो जाए, तो घायल को सीधे 40-50 किलोमीटर दूर गोरखपुर या बस्ती रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं की कमी है और मरीजों को मामूली दर्द की दवा भी बाहर के मेडिकल स्टोर से लानी पड़ती है। अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी बुनियादी मशीनें या तो खराब हैं या उन्हें चलाने वाला ऑपरेटर नहीं है।
असर: गरीब जनता निजी अस्पतालों के महंगे इलाज के नीचे दबती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन धनघटा की जनता के लिए आज भी 'इलाज' एक सपना बना हुआ है।
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