टांडा (अंबेडकरनगर)। टांडा तहसील, जो विश्व प्रसिद्ध बुनकरी उद्योग का केंद्र है, वहाँ इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बुनकरों की बिजली सब्सिडी और पुराने बकाया बिलों का निपटारा है।
विस्तृत रिपोर्ट: टांडा के हजारों बुनकर परिवार पिछले लंबे समय से बिजली के 'फ्लैट रेट' (Fixed Rate) सिस्टम को पूरी तरह लागू करने की मांग कर रहे हैं। सरकार द्वारा मीटर आधारित रीडिंग और पुराने बकाये की वसूली के लिए भेजे जा रहे नोटिसों के कारण यहाँ का पावरलूम उद्योग ठप होने की कगार पर पहुँच गया है। तहसील प्रशासन और बिजली विभाग (PVVNL) के बीच समन्वय की कमी के कारण बुनकरों में गहरा रोष है। हाल ही में तहसील मुख्यालय पर हुए प्रदर्शनों ने इस मुद्दे को शासन स्तर तक पहुँचाया है। प्रशासन का तर्क है कि पारदर्शी व्यवस्था के लिए मीटर जरूरी है, जबकि बुनकरों का कहना है कि उनकी आय इतनी नहीं है कि वे कमर्शियल दरों पर भुगतान कर सकें। यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि टांडा की सांस्कृतिक पहचान और हजारों परिवारों की रोटी से जुड़ा है। तहसील प्रशासन अब विशेष शिविर लगाकर ब्याज माफी (OTS scheme) के जरिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
0 टिप्पणियाँ