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आकांक्षी ब्लॉक' में शिक्षा और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की कमी


​इटवा। सिद्धार्थनगर की इटवा तहसील, जो नेपाल सीमा के करीब स्थित है, वर्तमान में केंद्र सरकार के 'आकांक्षी ब्लॉक' कार्यक्रम के तहत विकास की मुख्यधारा में आने के लिए संघर्ष कर रही है। यहाँ का सबसे बड़ा मुद्दा उच्च शिक्षा और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का अभाव है।
​विस्तृत रिपोर्ट: इटवा तहसील के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों गांवों के युवाओं को स्नातक और परास्नातक शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय या पड़ोसी जिलों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय अभिभावकों और छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकारी डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के पद दशकों से रिक्त पड़े हैं, जिससे ग्रामीण प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। स्वास्थ्य के मोर्चे पर, इटवा सीएचसी (CHC) पर बुनियादी सुविधाओं का तो विस्तार हुआ है, लेकिन क्रिटिकल केयर और एम्बुलेंस सेवाओं की समय पर उपलब्धता न होने के कारण अक्सर मरीजों को लखनऊ या गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है, जिससे रास्ते में ही दम तोड़ने की घटनाएं सामने आती हैं। तहसील प्रशासन अब शासन को 'मॉडल ब्लॉक' योजना के तहत नए तकनीकी संस्थानों और ट्रामा सेंटर के लिए प्रस्ताव भेज रहा है। यह मुद्दा पोर्टल के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर क्षेत्र के भविष्य और जीवन रक्षा से जुड़ा है।

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