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भानपुर तहसील – नीलगायों का आतंक और उजाड़ होते खेत


​बस्ती, उत्तर प्रदेश।
आज दिनांक 21 फरवरी, 2026 की सुबह जब भानपुर तहसील के असोगवा, अजगैवाजंगल और आसपास के गांवों के किसान अपने खेतों में पहुँचे, तो मंजर वही पुराना और दर्दनाक था। रात भर की मेहनत से सींची गई मटर और गेहूं की फसल को नीलगायों (वनरोज) के झुंड ने पूरी तरह रौंद दिया था। यह केवल एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि भानपुर तहसील के लगभग हर गांव की नियति बन चुकी है।
​मुद्दे की गंभीरता: फसलों की बर्बादी और आर्थिक कमर
​भानपुर तहसील मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहाँ के किसानों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से रबी और खरीफ की फसलों पर टिकी है। वर्तमान में गेहूं, सरसों और दलहन की फसलें तैयार होने की कगार पर हैं, लेकिन नीलगायों के 20 से 50 की संख्या वाले झुंड रात के अंधेरे में खेतों पर धावा बोल रहे हैं।
​किसान रामफेर यादव बताते हैं, "हम रात भर जागकर 'खेत की रखवाली' करते हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का फायदा उठाकर ये जानवर फसलें चट कर जाते हैं। अगर हम इन्हें भगाने की कोशिश करते हैं, तो ये हिंसक होकर हमला भी कर देते हैं।"
​प्रशासनिक उदासीनता और कागजी वादे
​तहसील प्रशासन और वन विभाग के पास इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं है। सरकार द्वारा 'खेत संरक्षण योजना' के तहत कंटीले तारों (Solar Fencing) पर सब्सिडी की बात तो की जाती है, लेकिन भानपुर के छोटे और सीमांत किसानों तक यह सुविधा नहीं पहुँच पा रही है। आवारा पशुओं के लिए बने गौशालाओं की स्थिति भी जर्जर है; वहां केवल पालतू छोड़े गए पशु रखे जाते हैं, जबकि जंगली नीलगायों के लिए कोई 'रेस्क्यू' या 'नसबंदी' जैसा प्रोग्राम धरातल पर नहीं दिख रहा।
​सामाजिक और सुरक्षा का खतरा
​यह मुद्दा केवल फसलों तक सीमित नहीं है। भानपुर-बस्ती मुख्य मार्ग और ग्रामीण सड़कों पर नीलगायों के अचानक दौड़ने से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। आज सुबह भी एक बाइक सवार नीलगाय से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीण अब इस मुद्दे को लेकर आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने 'वनरोज' की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने या उन्हें जंगलों की ओर खदेड़ने की व्यवस्था नहीं की, तो वे तहसील मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
​समाधान की राह: क्या होना चाहिए?
​बस्ती मंडल न्यूज़ की पड़ताल में कुछ समाधान निकलकर सामने आए हैं:
​इको-फेंसिंग: वन विभाग को सामुदायिक स्तर पर प्राकृतिक बाड़ लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
​ट्रैंक्विलाइजर और शिफ्टिंग: घनी आबादी वाले कृषि क्षेत्रों से इन जानवरों को पकड़कर सुदूर वन क्षेत्रों में छोड़ना।
​मुआवजा प्रक्रिया का सरलीकरण: नीलगायों द्वारा नष्ट की गई फसल का उचित सर्वे कराकर लेखपाल के माध्यम से तुरंत राहत राशि प्रदान करना।

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