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चकमारुफ के सब्र का इम्तिहान न ले 'खान तारा' पावर हाउस: जर्जर तारों से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा!

डूमरियागंज (सिद्धार्थनगर):
सिद्धार्थनगर के चकमारुफ गांव में बिजली विभाग की लापरवाही अब ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ रही है। गांव के ऊपर से गुजर रहे बिजली के नंगे तार किसी "लटकती तलवार" से कम नहीं हैं। पेड़ों की टहनियों में उलझे ये जर्जर तार न केवल गांव की बिजली व्यवस्था को ठप कर रहे हैं, बल्कि हर पल किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रहे हैं।
​"गांठ" के भरोसे कब तक चलेगी बिजली?
​हैरानी की बात यह है कि जब भी तार टूटता है, खान तारा पावर हाउस के कर्मचारी आते हैं और जर्जर तारों में 'जोड़' लगाकर चले जाते हैं। चकमारुफ के जागरूक ग्रामीणों का सवाल है कि क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार है? बार-बार की पैचिंग और जुगाड़ से तंग आकर अब ग्रामीण आर-पार के मूड में हैं।
​अप्रैल का बहाना... ग्रामीणों में रोष!
​विभाग द्वारा "अप्रैल में नई कंपनी आने" का हवाला देकर काम को टाला जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बीच कोई जनहानि या मवेशी की जान जाती है, तो क्या इसका हर्जाना विभाग भरेगा? अन्य गांवों में एबी केबल (प्लास्टिक वाला सुरक्षित तार) लग चुका है, तो फिर चकमारुफ के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?
​साफ चेतावनी: अब ज्ञापन नहीं, समाधान चाहिए!
​चकमारुफ के ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन को आगाह किया है कि उन्हें अब कोरे आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहिए। उनकी मांग है कि तत्काल नंगे तारों को हटाकर प्लास्टिक वाली सुरक्षित केबल बिछाई जाए, ताकि गांव का बच्चा-बच्चा सुरक्षित महसूस कर सके। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण बिजली दफ्तर का घेराव करने से पीछे नहीं हटेंगे।

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