बस्ती। प्रदेश सरकार जहाँ एक तरफ भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का ढोल पीट रही है, वहीं बस्ती जिले में रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत 'बांके चोर' में हो रहा मनरेगा घोटाला प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस धांधली की साक्ष्यों सहित शिकायत जिलाधिकारी (DM) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) से की गई, लेकिन कार्रवाई के बजाय भ्रष्टाचारियों को 'अभयदान' मिलता दिख रहा है।
साक्ष्यों को कूड़ेदान में डाल रहा प्रशासन?
शिकायतकर्ता द्वारा 13 फरवरी और फिर 18 फरवरी को सीधे DM और CDO बस्ती को ईमेल के जरिए तकनीकी साक्ष्य भेजे गए थे। साक्ष्यों में स्पष्ट था कि एक ही मजदूर की फोटो का उपयोग दो अलग-अलग मास्टर रोल पर करके सरकारी धन की चोरी की जा रही है। लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई जवाब देना तो दूर, जांच तक शुरू नहीं कराई।
गंभीर सवाल: क्या बड़े अधिकारियों की भी है संलिप्तता?
अब जब विवादास्पद मास्टर रोल को FTO (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) के लिए भेज दिया गया है, तो जनता सीधे जिले के आला अधिकारियों से ये सवाल पूछ रही है:
DM और CDO की चुप्पी का क्या मतलब निकाला जाए?
क्या भ्रष्टाचार की इस गंगा में ऊपर से नीचे तक सब हाथ धो रहे हैं?
शिकायत के बाद भी भुगतान क्यों नहीं रोका गया? तकनीकी गड़बड़ी पकड़े जाने के बावजूद मास्टर रोल को 'शून्य' करने के बजाय उसे भुगतान के लिए आगे बढ़ाना क्या अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा नहीं करता?
IGRS पोर्टल की साख पर बट्टा: जब जिले के सबसे बड़े अधिकारियों को सीधे मेल करने पर भी सुनवाई नहीं हो रही, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचेगा मामला
प्रशासन की इस संदिग्ध कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले रवैये के खिलाफ अब शिकायतकर्ता और स्थानीय ग्रामीण मुख्यमंत्री पोर्टल (UP CM Helpline) और लोकपाल का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिले के अधिकारी ही घोटालेबाजों के साथ खड़े नजर आएंगे, तो वे इस मामले को लखनऊ तक ले जाएंगे।
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