अम्बेडकरनगर। जिले में बिजली विभाग की 'रिवैंप योजना' कागजों पर तो चमक रही है, लेकिन जमीन पर यह लोगों की जान के लिए आफत बनी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर की मुख्य सड़कों और चौराहों पर हाई-वोल्टेज तार बिना किसी सुरक्षा जाली (गार्डिंग) के लटक रहे हैं, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को दावत दे सकते हैं।
पटेलनगर तिराहा: यहाँ मौत और जिंदगी के बीच सिर्फ एक तार का फासला
जिले के सबसे व्यस्त अकबरपुर-टांडा मार्ग स्थित पटेलनगर तिराहे पर स्थिति सबसे भयावह है। यहाँ 11,000 और 33,000 वोल्ट की हाई-टेंशन लाइनें एक-दूसरे को क्रॉस करती हैं। नियम के मुताबिक, ऐसी जगहों पर सुरक्षा जाली अनिवार्य है, लेकिन यहाँ तार खुले आसमान के नीचे नंगे मौत बनकर दौड़ रहे हैं।
हादसे के मुहाने पर ये मुख्य स्थान:
कलेक्ट्रेट मुख्य गेट: वीआईपी इलाके में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी।
राजकीय हवाई पट्टी: यहाँ भी तारों का जाल असुरक्षित स्थिति में है।
अकबरपुर-बसखारी मार्ग: व्यस्ततम रास्तों पर तारों का मकड़जाल।
ग्रामीण क्षेत्र: यहाँ तो स्थिति और भी बदतर है, जहाँ रिवैंप योजना के दावे पूरी तरह फेल नजर आते हैं।
क्या कहती है रिवैंप योजना?
करोड़ों की इस योजना का मुख्य उद्देश्य जर्जर तारों को बदलना और सुरक्षा जाली (Guarding) लगाना था ताकि तार टूटने पर वह सीधे सड़क या किसी व्यक्ति पर न गिरे। विभाग शहर में 100% काम पूरा होने का दावा तो कर रहा है, लेकिन हकीकत इन तस्वीरों में साफ दिख रही है।
जिम्मेदारों का रटा-रटाया जवाब
मामले पर जब अधीक्षण अभियंता रजनीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने हमेशा की तरह आश्वासन देते हुए कहा कि "असुरक्षित तारों को चिह्नित किया जा रहा है और जल्द ही सुरक्षा जाली लगवाई जाएगी।"
सवाल: क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? आखिर बजट खपाने के बाद भी जनता की सुरक्षा दांव पर क्यों है?
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