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एनएच-28 पर 'अवैध कट्स' और एनएचएआई की लापरवाही—मौत का सफर कब होगा खत्म?


​विस्तृत विश्लेषण 
बस्ती जिले की हर्रैया तहसील से गुजरने वाला नेशनल हाईवे-28, जो पूर्वांचल को राजधानी लखनऊ से जोड़ता है, आज स्थानीय नागरिकों के लिए एक बड़ी मुसीबत और 'मौत का गलियारा' बन चुका है। इस तहसील के अंतर्गत आने वाले लगभग 25 किलोमीटर के दायरे में एनएचएआई (NHAI) और स्थानीय रसूखदारों की मिलीभगत से दर्जनों 'अवैध कट्स' बना दिए गए हैं। आज की सत्यापित रिपोर्ट यह है कि इन अवैध कट्स के कारण पिछले एक महीने में 15 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
​जमीनी हकीकत और प्रशासनिक विफलता:
हर्रैया तहसील प्रशासन और पुलिस विभाग के बार-बार नोटिस देने के बावजूद, एनएचएआई के अधिकारियों ने इन अवैध रास्तों को स्थायी रूप से बंद करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ढाबा मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी सुविधा के लिए डिवाइडर को अवैध रूप से कटवा दिया है। आज शाम जब एसडीएम हर्रैया ने विक्रमजोत और छावनी क्षेत्र का दौरा किया, तो पाया कि कई स्थानों पर पत्थरों को हटाकर फिर से रास्ता बना लिया गया है। यह केवल एक सड़क सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति को नुकसान और मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।
​जनता का आक्रोश और भविष्य की चुनौती:
बस्ती मंडल न्यूज़ की टीम ने जब स्थानीय लोगों से बात की, तो पता चला कि रात के समय इन कट्स पर कोई स्ट्रीट लाइट या चेतावनी बोर्ड नहीं होता। तेज रफ्तार से आने वाले वाहन अचानक सामने आए किसी ट्रैक्टर या मवेशी को देख नहीं पाते, जिससे भीषण टक्कर होती है। तहसील मुख्यालय पर आज शाम इसी मुद्दे को लेकर व्यापार मंडल ने एक ज्ञापन भी सौंपा है। यदि प्रशासन ने इन अवैध कट्स को कंक्रीट की दीवारों से बंद नहीं किया, तो आने वाले कोहरे के सीजन में यह मार्ग और भी भयावह हो जाएगा। हर्रैया तहसील का यह मुद्दा आज शासन तक पहुँच चुका है, लेकिन समाधान कब होगा, यह बड़ा सवाल है।

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