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अम्बेडकरनगर: रामनगर बाजार में 'जाम का झाम', राहगीरों और छात्रों की बढ़ी मुश्किलें


जि .स.मृत्युंजय शर्मा ​रामनगर, अम्बेडकरनगर। जनपद की प्रमुख बाजारों में शुमार रामनगर बाजार इन दिनों अपनी रौनक से ज्यादा भीषण जाम के लिए चर्चा में है। आलम यह है कि सुबह हो या शाम, सड़क पर रेंगते वाहन और फंसती भीड़ स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है।
​जाम के प्रमुख कारण: क्यों थम रही है रफ्तार?
​बाजार की भौगोलिक स्थिति और अव्यवस्थाओं ने मिलकर इस समस्या को विकराल बना दिया है:
​अतिक्रमण की मार: दुकानदारों द्वारा सड़क की पटरियों तक सामान फैलाना और अवैध रेहड़ी-पटरी वालों के जमावड़े ने सड़क की चौड़ाई को आधा कर दिया है।
​अव्यवस्थित पार्किंग: बाजार में वाहनों के खड़े होने के लिए कोई निश्चित स्थान न होने के कारण लोग बीच सड़क पर ही गाड़ियाँ खड़ी कर देते हैं।
​भारी वाहनों का प्रवेश: पीक आवर्स के दौरान भारी वाहनों का बाजार के बीच से गुजरना आग में घी डालने का काम करता है।
​सबसे ज्यादा प्रभावित: छात्र और राहगीर
​इस जाम का सबसे दर्दनाक पहलू उन छात्र-छात्राओं की परेशानी है, जिन्हें समय पर स्कूल या कोचिंग पहुंचना होता है।
​छात्रों की दुश्वारी: स्कूल बसें और साइकिल सवार छात्र घंटों जाम में फंसे रहते हैं, जिससे न केवल उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है बल्कि इस तपती गर्मी और भीड़ में उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।
​राहगीरों का हाल: पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए तो फुटपाथ बचे ही नहीं हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को भीड़भाड़ के बीच से निकलने में खासी जद्दोजहद करनी पड़ती है।
​आपातकालीन सेवाएं प्रभावित: जाम के कारण कभी-कभी एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी फंस जाती हैं, जो किसी बड़े खतरे को दावत दे रही हैं।
​स्थानीय लोगों का कहना है: "रामनगर बाजार में जाम अब एक स्थायी समस्या बन चुका है। प्रशासन को चाहिए कि यहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई हो।"
​समाधान की दरकार
​स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग को इस ओर त्वरित ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि रामनगर की जनता को इस 'जाम के झाम' से स्थायी निजात मिल सके। मुख्य चौराहों पर होमगार्डों की तैनाती और वन-वे व्यवस्था लागू करना एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

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