खलीलाबाद, संत कबीर नगर। उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में परिषदीय शिक्षकों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रमोशन और सेवा शर्तों में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में जिले के हजारों शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार (24 फरवरी) को दूसरे दिन भी शिक्षकों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया और सरकार के इस निर्णय को 'काला कानून' करार दिया।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन ने अब जिले के हर ब्लॉक और हर विद्यालय तक अपनी पहुँच बना ली है।
विरोध का तरीका: शिक्षण कार्य के साथ संघर्ष
खलीलाबाद के जूनियर हाई स्कूल पटखौली में विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र देखा गया। यहाँ जिलाध्यक्ष अंबिका देवी यादव के नेतृत्व में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर न केवल कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाया, बल्कि बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी और एसआईआर (स्कूल इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) जैसे विभागीय कार्यों को भी इसी विरोध के साथ पूरा किया। शिक्षकों का कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं चाहते, लेकिन अपने अधिकारों के लिए झुकेंगे भी नहीं।
TET अनिवार्यता पर छिड़ा रार: क्या है शिक्षकों की मांग?
शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष अंबिका देवी यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुराने शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता थोपना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने इसे 'काला कानून' बताते हुए कहा कि जो शिक्षक दशकों से सेवा दे रहे हैं, उन्हें पदोन्नति के लिए पुनः परीक्षा के दायरे में लाना उनके अनुभव का अपमान है।
संघ के मंत्री केसी सिंह और संरक्षक गंगा प्रसाद यादव ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न कर रही है। ट्विटर (X) पर चले महा-अभियान की सफलता के बाद अब यह लड़ाई धरातल पर लड़ी जा रही है।
तीन दिवसीय आंदोलन का खाका: 26 फरवरी को बड़ा धमाका
जिलाध्यक्ष ने बताया कि यह विरोध प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से चलेगा:
23 से 25 फरवरी: सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे।
26 फरवरी: यह आंदोलन उग्र रूप लेगा। जिले के सभी शिक्षक BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) कार्यालय पर विशाल धरना देंगे।
डीएम कार्यालय तक मार्च: धरने के बाद शिक्षक समुदाय BSA कार्यालय से कलेक्ट्रेट (DM कार्यालय) तक जुलूस निकालेगा और प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपेगा।
इन दिग्गजों ने संभाली कमान
विरोध प्रदर्शन में जिले के दिग्गज शिक्षक नेताओं ने शिरकत की। इसमें कोषाध्यक्ष विपिन कुमार वर्मा, विजय नाथ यादव, रामसरन यादव, जफीर अली, मो. आजम, मो. शोएब अख्तर, जयभान चौधरी, अभिनव प्रताप सिंह, वेद प्रकाश त्रिपाठी, दुर्गा यादव, अनिल कुमार सिंह, शिवचरन गुप्ता, सुयेब अहमद, राहुल यादव, रामकरन पासवान, रामनाथ यादव, प्रेम प्रकाश दूबे, प्रमोद पाठक, इन्द्रकान्त चौधरी, बृजभूषण यादव, रमेश भार्गव, दिनेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार, पवन राय, नवीन त्रिपाठी, चन्द्रपाल सिंह, चन्द्रशेन और राम निवास जैसे नाम शामिल रहे।
इसके साथ ही जूनियर शिक्षक संघ के अब्दुर्रहीम, जलालुद्दीन, शमीम अहमद, मुबारक हुसैन, दिनेश त्रिपाठी, राज कुमारी, कीर्ति, राकेश कुमार सहित सभी ब्लॉकों के पदाधिकारियों ने भी इस मुहिम को अपना समर्थन दिया है।
न्यूज़ पोर्टल के लिए विशेष विश्लेषण (Editor's View):
संत कबीर नगर में शिक्षकों की यह एकजुटता आने वाले दिनों में शासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि 26 फरवरी के धरने में भारी भीड़ उमड़ती है, तो इसका असर पूरे मंडल (बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर) पर पड़ेगा। पोर्टल के माध्यम से हम इस आंदोलन की हर छोटी-बड़ी अपडेट अपने पाठकों तक पहुँचाते रहेंगे।
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