संत कबीर नगर जिले की बघौली और बखिरा क्षेत्र की तहसील सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय महत्व के 'बखिरा पक्षी अभयारण्य' पर आज भू-माफियाओं की नजर लग गई है। आज शाम की विस्तृत रिपोर्ट यह है कि अभयारण्य के 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 'ईको-सेंसिटिव जोन' में धड़ल्ले से अवैध निर्माण कार्य चल रहे हैं। बिना वन विभाग और प्रदूषण बोर्ड की एनओसी के बड़े-बड़े गोदाम और दुकानें बनाई जा रही हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास को खतरा पैदा हो गया है।
पर्यावरण का संकट और प्रशासनिक मिलीभगत:
स्थानीय पर्यावरणविदों ने आज शाम एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया है कि अवैध निर्माण के कारण झील की जलधारा में बाधा आ रही है। पक्षियों के शोर की जगह अब वहां निर्माण मशीनों की आवाजें गूंजती हैं। ताज्जुब की बात यह है कि तहसील प्रशासन और वन विभाग के दफ्तर चंद दूरी पर होने के बावजूद इन निर्माणों पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली सफेदपोश लोग इस जमीन की बंदरबांट में शामिल हैं।
पर्यटन पर असर:
बखिरा झील को सरकार ने पर्यटन हब बनाने का वादा किया था, लेकिन इस अवैध अतिक्रमण ने पूरे प्रोजेक्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। शाम को आने वाले पर्यटक अब वहां की प्राकृतिक सुंदरता की जगह कंक्रीट के ढांचे देख रहे हैं। आज शाम तहसील कार्यालय में इस मुद्दे पर कुछ स्थानीय युवाओं ने विरोध दर्ज कराया है। यदि इन अवैध निर्माणों को तुरंत ध्वस्त नहीं किया गया, तो बखिरा झील का अस्तित्व केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। यह मुद्दा अब एनजीटी (NGT) तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।
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