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माघ मेले की तैयारियों में सुस्ती और राप्ती तट पर पसरी अव्यवस्था


​विस्तृत रिपोर्ट:
सिद्धार्थनगर की ऐतिहासिक तहसील बांसी में आगामी माघ मेले और स्नान पर्व को लेकर प्रशासन के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। आज शाम की मुख्य खबर यह है कि राप्ती नदी के तट पर होने वाले इस भव्य आयोजन के लिए अब तक घाटों की सफाई और बैरिकेडिंग का काम शुरू भी नहीं हो पाया है। बांसी की पहचान इस मेले से जुड़ी है, जहाँ नेपाल और पड़ोसी जिलों से लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन इस बार की तैयारी शून्य नजर आ रही है।
​अव्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल:
बांसी तहसील प्रशासन ने कागजों पर तो बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाई हैं, लेकिन धरातल पर राप्ती के घाटों पर गंदगी का अंबार लगा है। शाम को जब स्थानीय नागरिकों ने घाटों का जायजा लिया, तो पाया कि वहां प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है और नदी की गहराई वाले स्थानों पर कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जो जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती होनी चाहिए, उसका भी अता-पता नहीं है। स्थानीय पंडा समाज और व्यापारियों ने आज शाम नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। व्यापारियों का कहना है कि यदि मेले की व्यवस्था ठीक नहीं हुई, तो इस साल उनका व्यापार पूरी तरह चौपट हो जाएगा। बांसी की यह ऐतिहासिक धरोहर आज प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रही है।

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