आज सिद्धार्थनगर स्थित माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) जंग का मैदान बन गया। दूर-दराज के गांवों से इलाज की उम्मीद लेकर आए सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों का गुस्सा आज सातवें आसमान पर पहुंच गया। सुबह 10 बजे के बाद भी ओपीडी की कुर्सियां खाली देख तीमारदारों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा और नारेबाजी की।
ग्राउंड रिपोर्ट:
हंगामे की मुख्य वजह डॉक्टरों की भारी देरी और अस्पताल में दवाइयों की किल्लत रही। इटवा, शोहरतगढ़ और बांसी जैसे इलाकों से आए परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ओपीडी में बैठने के बजाय अपने निजी आवासों या प्राइवेट प्रैक्टिस में व्यस्त हैं। इतना ही नहीं, मरीजों को सरकारी दवाइयों के बजाय बाहर की महंगी दवाइयां लिखने का धंधा भी धड़ल्ले से चल रहा है। काफी देर तक चले इस हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों ने जैसे-तैसे स्थिति को संभाला।
बस्ती मंडल न्यूज़ का सवाल: आखिर कब तक गरीब जनता इन सफेदपोशों की मनमानी का शिकार होती रहेगी? क्या प्रशासन सिर्फ कागजी दावों तक ही सीमित रहेगा?
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