इटवा, सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर में हर वर्ष गेहूं की फसल में लगने वाली भीषण आग किसानों के लिए केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि एक 'सालाना त्रासदी' बनती जा रही है। महीनों की हाड़-तोड़ मेहनत, बैंक के कर्ज और परिवार की उम्मीदों से तैयार गेहूं की फसल जब पल भर में जलकर राख होती है, तो किसान भुखमरी की कगार पर पहुँच जाता है।
सिंचाई का दौर शुरू, बढ़ रही है चिंता
वर्तमान में जिले के किसान गेहूं की सिंचाई में जुटे हैं। आने वाले दिनों में फसल पककर तैयार होगी, जिसके साथ ही लू और गर्मी के कारण आगजनी की घटनाएं बढ़ने का खतरा मंडराने लगेगा। पूर्व के वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सैकड़ों बीघा फसल हर साल प्रशासनिक ढिलाई और संसाधनों की कमी के कारण जल जाती है।
संसाधनों की कमी और प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि हर साल आग लगने पर दमकल की गाड़ियां तब पहुँचती हैं जब सब कुछ खाक हो चुका होता है। अब तक प्रशासन की ओर से दमकल कर्मियों की संख्या बढ़ाने या संवेदनशील क्षेत्रों में गाड़ियों की स्थायी तैनाती को लेकर कोई ठोस 'एक्शन प्लान' (Action Plan) धरातल पर नज़र नहीं आ रहा है।
समाजसेवी राम वृक्ष गुप्ता ने उठाई आवाज़
'नव युवक ग्राम विकास समिति' के संरक्षक एवं समाजसेवी राम वृक्ष गुप्ता ने इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन को आगाह किया है। उन्होंने मांग की है कि:
1-प्रत्येक विकास खंड (ब्लॉक) स्तर पर छोटे दमकल वाहनों की तैनाती की जाए।
2-संवेदनशील गांवों में 'फायर लाइन' और ग्राम स्तरीय निगरानी समितियां बनाई जाएं।
3-तहसीलों में संसाधनों को अभी से दुरुस्त किया जाए ताकि 'रिस्पॉन्स टाइम' कम हो सके।
मुख्यमंत्री से अपील
राम वृक्ष गुप्ता ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे हस्तक्षेप की अपील करते हुए मांग की है कि किसानों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन को विशेष निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इंतज़ाम नहीं हुए, तो इस बार भी किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ सकती है।
0 टिप्पणियाँ