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सिद्धार्थ नगर: डुमरियागंज ब्लॉक में मनरेगा का 'डिजिटल खेल', 16 सेकंड में बदल गए मजदूर!

पड़ताल बस्ती मंडल न्यूज़
​सिद्धार्थ नगर (डुमरियागंज): जनपद के डुमरियागंज ब्लॉक में मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए लागू की गई 'डिजिटल अटेंडेंस' (NMMS) में भारी सेंधमारी का मामला सामने आया है। हमारे पोर्टल की विशेष पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि कैसे तकनीकी खामियों और मिलीभगत का फायदा उठाकर सरकारी धन के बंदरबांट की कोशिश की जा रही है।
​तकनीकी डेटा खोल रहा है पोल
​डुमरियागंज ब्लॉक के अंतर्गत एक निर्माणाधीन सीसी रोड (कार्य कोड: 3151010105...) के मस्टर रोल डेटा ने डिजिटल निगरानी प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आधिकारिक पोर्टल से मिले साक्ष्य बताते हैं कि:
​मस्टर रोल संख्या 8365: की फोटो 11:14:56 AM पर ली गई।
​मस्टर रोल संख्या 8366: की फोटो महज 16 सेकंड बाद 11:15:12 AM पर अपलोड की गई।
​सवाल यह उठता है कि क्या 16 सेकंड के भीतर एक समूह को हटाकर दूसरे मस्टर रोल के मजदूरों का वेरिफिकेशन करना संभव है? या फिर एक ही फोटो को बार-बार इस्तेमाल कर कोरम पूरा किया जा रहा है?
​संख्या का भारी अंतर
​हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड में इन दोनों मस्टर रोल के तहत कुल 9 मजदूरों को उपस्थित (Present) दिखाया गया है, जबकि मौके पर ली गई फोटो में मौजूद मजदूरों की संख्या इससे कहीं कम नजर आ रही है। यह सीधे तौर पर फर्जी हाजिरी के जरिए भुगतान निकालने का मामला प्रतीत होता है।
​नियमों की सरेआम अनदेखी
​मनरेगा के सख्त निर्देश हैं कि कार्यस्थल पर सुबह और दोपहर की दो अलग-अलग फोटो अपलोड होनी चाहिए। लेकिन इस मामले में पोर्टल खुद गवाही दे रहा है कि "Second Photo is not uploaded!"। इसके बावजूद इन अटेंडेंस रिपोर्ट्स का स्वीकृत होना डुमरियागंज ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
​जियो-टैगिंग की भी खुली पोल
​दोनों फोटो के जियो-कोऑर्डिनेट्स (27.1292..., 82.5505...) यह पुष्ट करते हैं कि कैमरा एक ही स्थान पर स्थिर था, लेकिन मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों के नाम बदल रहे थे। यह डिजिटल साक्ष्य इस पूरे मामले में बड़े 'गड़बड़झाले' की ओर इशारा कर रहे हैं।
एक ही फोटो से दो मस्टर रोल: 'कट-कॉपी-पेस्ट' का खेल
​पड़ताल में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि मस्टर रोल संख्या 8365 और 8366 दोनों में एक ही फोटो का इस्तेमाल किया गया है। नियमतः, हर मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों की अलग से फोटो होनी चाहिए। लेकिन यहाँ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मेहनत करने के बजाय एक ही फोटो को दोनों जगह चिपका दिया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सॉफ्टवेयर और सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने का स्पष्ट प्रमाण है। 16 सेकंड के अंतर पर एक ही तस्वीर का दो मस्टर रोल में होना यह साबित करता है कि मजदूरों की मौजूदगी महज कागजी है।
​संपादकीय टिप्पणी: अभी सुरक्षा और जांच के कारणों से विशिष्ट ग्राम पंचायत के नाम का खुलासा नहीं किया जा रहा है। हमारे पास संबंधित ग्राम पंचायत के जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ पुख्ता डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। यदि जिला प्रशासन और ब्लॉक प्रशासन इस पर संज्ञान नहीं लेता, तो अगले अंक में पंचायत के नाम सहित पूरी सूची सार्वजनिक की जाएगी

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