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डुमरियागंज में राप्ती का तांडव और प्रशासन की तैयारी – क्या इस बार बचेंगे तटबंध?


​डुमरियागंज, सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर जिले की सबसे संवेदनशील तहसील डुमरियागंज के लिए राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ना केवल एक खबर नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों के लिए खौफ का मंजर होता है। आज शनिवार को तहसील समाधान दिवस के अवसर पर उमड़ी भीड़ और फरियादियों की शिकायतों ने एक बार फिर प्रशासन का ध्यान नदी कटान और तटबंधों की बदहाली की ओर खींचा है।
​अशरफपुर और भदई में दहशत का माहौल
​डुमरियागंज तहसील के अंतर्गत आने वाले अशरफपुर, भदई, ककराही और सेहरी जैसे गांव राप्ती नदी के बिल्कुल मुहाने पर बसे हैं। आज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, नदी की धारा ने इन गांवों के पास तेजी से मिट्टी का कटान शुरू कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के समय प्रशासन 'रेस्क्यू ऑपरेशन' तो चलाता है, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। आज तहसील मुख्यालय पर आए किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते 'स्टड' और 'ठोकर' का निर्माण नहीं हुआ, तो सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में समा जाएगी।
​सिंचाई विभाग को 5 करोड़ का अल्टीमेटम
​प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन ने सिद्धार्थनगर जिले के लिए बाढ़ बचाव हेतु विशेष फंड आवंटित किया है। डुमरियागंज तहसील में तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। आज उपजिलाधिकारी (SDM) ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे मानसून आने का इंतजार न करें। अक्सर देखा गया है कि जब नदी उफान पर होती है, तब बोरियों में बालू भरकर डालने का काम शुरू होता है, जो पूरी तरह निष्प्रभावी रहता है। इस बार प्रशासन का दावा है कि 'प्री-मानसून ड्रैजिंग' और तटबंधों की ऊंचाई बढ़ाने का काम मार्च के प्रथम सप्ताह से शुरू कर दिया जाएगा।
​नलकूप और बिजली संकट: किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर
​नदी की समस्या के साथ-साथ डुमरियागंज के किसान आज सिंचाई संकट से भी जूझ रहे हैं। तहसील के ग्रामीण इलाकों में लगे सरकारी नलकूपों में से लगभग 30% या तो खराब हैं या कम वोल्टेज के कारण चल नहीं पा रहे हैं। आज की शिकायतों में सबसे अधिक मामले बिजली चोरी के नाम पर किसानों के उत्पीड़न और खराब ट्रांसफार्मर न बदलने के आए हैं। गेहूं की फसल इस समय अपने महत्वपूर्ण दौर में है, और पानी की कमी सीधे तौर पर पैदावार को प्रभावित कर सकती है। डुमरियागंज तहसील प्रशासन ने आज विद्युत विभाग को चेतावनी दी है कि वे रोस्टर के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करें।
​अवैध खनन: नदी के स्वरूप से खिलवाड़
​एक और गंभीर मुद्दा जो आज की चर्चा में रहा, वह है अवैध बालू खनन। डुमरियागंज के कुछ सुदूर इलाकों में रात के अंधेरे में माफिया नदी की तलहटी से बालू निकाल रहे हैं। इससे नदी की धारा का रुख बदल रहा है और तटबंधों की नींव कमजोर हो रही है। प्रशासन ने आज की बैठक में राजस्व निरीक्षकों को सख्त हिदायत दी है कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों को सीधे सीज किया जाए और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए।

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