संत कबीर नगर। सरयू नदी के किनारे बसी धनघटा तहसील आज एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट से जूझ रही है— 'उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों का शून्य होना'।
मुद्दे की गहराई:
आज सुबह धनघटा बस स्टैंड पर दर्जनों युवा हाथ में झोला लिए दिल्ली, मुंबई और सूरत की बसों का इंतजार कर रहे हैं। यह दृश्य दिल दहला देने वाला है। धनघटा तहसील में एक भी प्रतिष्ठित सरकारी डिग्री कॉलेज या तकनीकी संस्थान (ITI/Polytechnic) ऐसा नहीं है जो आधुनिक बाजार के अनुरूप कौशल प्रदान कर सके। यहाँ का युवा इंटरमीडिएट के बाद या तो खेती में हाथ बंटाता है या फिर मजदूरी के लिए महानगरों की ओर रुख करता है।
रोजगार की चुनौती:
स्थानीय स्नातक छात्र विकास सिंह का कहना है, "पढ़ाई के लिए हमें खलीलाबाद या गोरखपुर जाना पड़ता है। आर्थिक तंगी के कारण आधे छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। यहाँ कोई इंडस्ट्री नहीं है, कोई फैक्ट्री नहीं है।" धनघटा की उपजाऊ जमीन और मानव संसाधन का सही उपयोग न होना इस क्षेत्र के पिछड़ेपन का मुख्य कारण है।
बस्ती मंडल न्यूज़ का नजरिया:
धनघटा को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं, बल्कि एक 'स्किल हब' के रूप में विकसित करने की जरूरत है। सरयू के किनारे बसे इस क्षेत्र में एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्रीज की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें सरकारी प्रोत्साहन की दरकार है।
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