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रोड नहीं तो वोट नहीं' – क्या 2027 में इटवा के इन गांवों में सन्नाटा पसरेगा?


​सिद्धार्थनगर (इटवा): नेता आते हैं, हाथ जोड़ते हैं, वोट लेते हैं और फिर गायब हो जाते हैं! लेकिन इस बार बस्ती मण्डल न्यूज़ सीधे सवाल कर रहा है उन जनप्रतिनिधियों से, जिन्होंने विकास के नाम पर सिर्फ खोखले वादे किए हैं।
​रसूलपुर से सेमरा तक की महज डेढ़ किलोमीटर की कच्ची सड़क आज इन दर्जनों गांवों के लिए 'कलंक' बन चुकी है। नव युवक ग्राम विकास समिति के बैनर तले अब ग्रामीणों ने आर-पार की जंग छेड़ दी है।

​प्रशासन से 'बस्ती मण्डल न्यूज़' के तीखे सवाल:

​क्या डेढ़ किलोमीटर की सड़क बनाना इतना बड़ा रॉकेट साइंस है? पिछले कई सालों से ग्रामीण गुहार लगा रहे हैं, फिर भी फाइलें दफ्तरों की धूल क्यों फांक रही हैं?

​नेताओं के लग्जरी गाड़ियाँ तो हर गली में पहुँच जाती हैं, पर बीमार मरीज़ को ले जाने के लिए एम्बुलेंस इस दलदल में क्यों फंस जाती है?



​ग्रामीणों की दो टूक: 'जुमलेबाज़ी' नहीं, 'डामरीकरण' चाहिए

​वरिष्ठ समाजसेवी रामवृक्ष गुप्ता और समिति के अध्यक्ष डॉ. जंगबहादुर चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि 2027 विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कोई धमकी नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है।
​"जब सड़क नहीं, तो सरकार कैसी? जब विकास नहीं, तो मतदान क्यों?"
​पूर्व प्रधान नारद गौतम, कृष्ण भवन यादव, अली हुसैन, समीदुल्लाह, सुरेश यादव और सत्येंद्र कुमार मिश्र सहित पूरी जनता ने कमर कस ली है। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो 2027 में यहाँ के पोलिंग बूथों पर सिर्फ सन्नाटा और विरोध के बैनर दिखेंगे।
​बस्ती मण्डल न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट।
​नोट: हक के लिए लड़िए, बस्ती मण्डल न्यूज़ आपके साथ है।

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