बस्ती: कुदरहा विकास क्षेत्र के विशुनपुरा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के नौवें दिन भक्ति की गंगा बही। कथा व्यास डॉ. विनोद शुक्ल और कमलेश पति मिश्र ने 'दक्ष के अहंकार और माता सती के आत्मदाह' के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को सीख दी कि अहंकार और घृणा मनुष्य के पतन और विनाश का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।
कथा का सार: अहंकार से हुआ सती का आत्मदाह
प्रतापगढ़ से पधारे कथा व्यास ने शनिवार रात की कथा में बताया कि किस प्रकार प्रजापति दक्ष ने अपने पद और प्रतिष्ठा के अहंकार में आकर भगवान भोलेनाथ का अपमान किया और उन्हें यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया।
माता सती का मायके गमन: भगवान शिव के समझाने के बावजूद माता सती अपने पिता के प्रति स्नेह के कारण यज्ञ में पहुंचीं, लेकिन वहां उन्हें केवल उपहास और तिरस्कार मिला।
भगवान शिव का अपमान: जब सती ने अपने पति (महादेव) को निमंत्रण न देने का कारण पूछा, तो दक्ष ने भगवान शिव के लिए अत्यंत कठोर और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
योगशक्ति से देह त्याग: पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण माता सती ने हवन कुंड की अग्नि में कूदकर अपने प्राणों की आहुति दे दी।
शिव का तांडव और अधर्म का अंत
कथा व्यास ने बताया कि सती के वियोग और अपमान से क्रोधित होकर भगवान भोलेनाथ ने ऐसा भयानक तांडव किया कि पूरी सृष्टि कांप उठी। अंततः अहंकारी राजा दक्ष को उनके कुकर्मों का दंड मिला। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ईश्वर की कृपा पाने के लिए हृदय में करुणा, दया और हर जीव के प्रति सम्मान होना अनिवार्य है।
इस अवसर पर मुख्य यजमान कृष्ण नारायण तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो भक्तिमय भजनों और कथा के सार में डूबे नजर आए।
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