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सिद्धार्थनगर में मोगिस हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग की जांच: 3 दिन में मांगा स्पष्टीकरण; अवैध पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड पर कार्रवाई अब भी अधूरी


बस्ती मंडल न्यूज़ | सिद्धार्थनगर



मोहाना चौराहे पर संचालित मोगिस हॉस्पिटल एंड पॉलीक्लिनिक और आसपास चल रहे अवैध जांच केंद्रों को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। खबर का संज्ञान लेते हुए सदर नायब तहसीलदार अमित सिंह और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई ऐसी व्यवस्थाएं पाई गईं, जो विभागीय रिकॉर्ड और नियमों के विपरीत बताई जा रही हैं। हालांकि टीम ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय अस्पताल प्रबंधन से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

दो इमारतों में संचालित मिला अस्पताल

​निरीक्षण में सामने आया कि मोगिस हॉस्पिटल एंड पॉलीक्लिनिक एक ही भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग इमारतों में इसका संचालन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार यह अस्पताल केवल 10 बेड का पंजीकृत है, लेकिन मौके पर अस्पताल का विस्तार इससे कहीं अधिक दिखाई दिया। निरीक्षण टीम में पीएचसी नौगढ़ के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनूप जायसवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।

एक्स-रे और सीआर मशीन भी मिली

​अस्पताल परिसर में निरीक्षण के दौरान एक्स-रे मशीन और सीआर (कंप्यूटेड रेडियोग्राफी) मशीन भी संचालित अवस्था में मिली। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार ऐसी मशीनों के संचालन के लिए अलग से लाइसेंस और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य होता है। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि अस्पताल के पास इन सेवाओं के लिए वैध अनुमति है या नहीं।

तीन दिन में मांगा गया स्पष्टीकरण

​निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। नोटिस में पूछा गया है कि जब अस्पताल का पंजीकरण 10 बेड का है तो दो इमारतों में इसका संचालन क्यों किया जा रहा है। साथ ही एक्स-रे और सीआर मशीन से संबंधित सभी दस्तावेज भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि प्रबंधन के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आदर्श पैथोलॉजी और आर्यन अल्ट्रासाउंड की जांच नहीं

​मोहाना चौराहे पर स्थित आदर्श पैथोलॉजी और आर्यन अल्ट्रासाउंड सेंटर का मामला भी पड़ताल में सामने आया था। जांच में पाया गया कि इन दोनों सेंटरों का स्वास्थ्य विभाग में कोई वैध पंजीकरण नहीं है। हैरानी की बात यह रही कि मोगिस हॉस्पिटल का निरीक्षण करने पहुंची टीम ने इन दोनों केंद्रों का निरीक्षण नहीं किया, जिससे अवैध जांच केंद्रों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मरीजों की सुरक्षा पर खतरा

​बिना पंजीकरण और मानकों के संचालित अस्पताल और जांच केंद्र मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। गलत जांच रिपोर्ट के कारण मरीजों का गलत इलाज हो सकता है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर मामला केवल नोटिस और जांच तक ही सीमित रह जाता है।


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