सिद्धार्थनगर (24 फरवरी, 2026): जिले की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के दावों के बीच आज जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. की औचक छापेमारी ने सरकारी स्कूलों की कड़वी सच्चाई उजागर कर दी है। मंगलवार को बांसी विकासखंड के स्कूलों में हुई इस कार्रवाई से पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। जिलाधिकारी ने न केवल लापरवाही पकड़ी, बल्कि तत्काल प्रभाव से 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने के निर्देश भी दिए।
सोनखर: सरकारी सुविधाओं के बाद भी बच्चे पढ़ने में 'जीरो'
जिलाधिकारी ने अपने निरीक्षण की शुरुआत पीएम कम्पोजिट विद्यालय, सोनखर से की। यहाँ जब DM ने क्लासरूम में जाकर खुद बच्चों का टेस्ट लिया और उनसे किताबें पढ़वाईं, तो स्थिति बेहद निराशाजनक मिली।
क्या मिला: अधिकांश बच्चे अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार पाठ पढ़ने में पूरी तरह असमर्थ दिखे।
DM की नाराजगी: जिलाधिकारी ने मौके पर ही प्रधानाध्यापिका गीता वर्मा को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों को कायाकल्प के तहत सारी सुविधाएं और शिक्षकों को भारी वेतन दे रही है, फिर भी बच्चों का यह शैक्षणिक स्तर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रधानाध्यापिका से इस लापरवाही पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
सूपाराजा: रजिस्टर में साइन, लेकिन स्कूल से गायब मिलीं प्रधानाध्यापिका
लापरवाही का दूसरा बड़ा मामला मॉडल प्राइमरी स्कूल, सूपाराजा में सामने आया। यहाँ अनुशासन की धज्जियां उड़ती मिलीं।
फर्जी हाजिरी: निरीक्षण के दौरान पाया गया कि प्रधानाध्यापिका जया साहनी ने उपस्थिति रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर तो कर दिए थे, लेकिन वे स्कूल परिसर से गायब थीं।
सख्त कार्रवाई: जिलाधिकारी ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए प्रधानाध्यापिका को 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने का निर्देश दिया और संबंधित अधिकारियों को अनुपस्थिति की रिपोर्ट तैयार करने को कहा।
DM का कड़ा संदेश: "सिर्फ रजिस्टर भरना नौकरी नहीं"
निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षकों का काम केवल रजिस्टर में हाजिरी लगाना नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य संवारना है। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और अन्य खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
स्कूलों का नियमित और बिना बताए निरीक्षण किया जाए।
जिन स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर कमजोर है, वहां के शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।
ड्यूटी के दौरान बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर वेतन काटने जैसी कार्रवाई की जाए।
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