छापेमारी में मिली बड़ी खामियां
मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) के नेतृत्व में निकली टीम ने जब कस्बों की गलियों में संचालित छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई जगहों पर बिना डिग्री के ही मरीज भर्ती किए गए थे और गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा था। जांच टीम ने पाया कि कुछ क्लीनिकों में एक्सपायरी दवाएं भी धड़ल्ले से बेची जा रही थीं।
तीन क्लीनिक सील, कई को नोटिस
आज की कार्रवाई के दौरान कुल तीन अवैध क्लीनिकों को मौके पर ही सील कर दिया गया। विभागीय टीम ने बताया कि इन क्लीनिकों के पास न तो कोई वैध डिग्री थी और न ही पैरामेडिकल स्टाफ की कोई ट्रेनिंग। इसके अलावा, करीब आधा दर्जन अन्य अस्पतालों को कागजात पेश करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए नोटिस जारी किया गया है।
प्रशासन की चेतावनी: "जनता की जान से खिलवाड़ नहीं होगा"
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि यह अभियान केवल एक दिन का नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां गरीब जनता इन झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंसकर अपनी जान गंवा देती है, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में केवल पंजीकृत डॉक्टरों या सरकारी अस्पताल में ही जाएं।
दुकानदारों ने गिराए शटर
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