विस्तृत रिपोर्ट:
बस्ती जिले की रुधौली तहसील के अंतर्गत आने वाला नगर पंचायत क्षेत्र इस समय कचरा निस्तारण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। आज की सबसे बड़ी खबर यह है कि शहर के बीचों-बीच और रिहायशी इलाकों के करीब बने 'अस्थायी डंपिंग ग्राउंड' के कारण स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। 800 शब्दों के विस्तार वाली इस समस्या की गहराई को समझें तो पता चलता है कि नगर पंचायत के पास अपना कोई वैज्ञानिक 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट' नहीं है। शाम होते ही जब हवा का रुख आबादी की तरफ होता है, तो कचरे की सड़ांध और वहां जलने वाले धुएं से लोगों को सांस लेना दूभर हो जाता है।
जमीनी हकीकत और प्रशासनिक विफलता:
रुधौली तहसील के वार्ड नंबर 5 और 6 के नागरिकों ने आज शाम एक विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सफाई कर्मी सारा कूड़ा उनके घरों के पास खाली पड़ी जमीन पर डाल रहे हैं। पिछले दो सालों से जमीन आवंटन की फाइल तहसील मुख्यालय और जिला मुख्यालय के बीच चक्कर काट रही है। प्रशासन ने एक स्थान चिन्हित भी किया था, लेकिन वहां के स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के कारण काम रुक गया। शाम की इस धुंध में कचरे के ढेर से निकलने वाली मीथेन गैस और बदबू ने बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा हमला किया है। स्थानीय डॉक्टरों के अनुसार, पिछले 15 दिनों में रुधौली में सांस के मरीजों और वायरल बुखार के मामलों में 35% की बढ़ोतरी हुई है।
अधूरी योजना और जनता की मांग:
रुधौली की जनता अब प्रशासन से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है। आज शाम उपजिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि तीन दिनों के भीतर कूड़े का उठान नहीं हुआ और फागिंग की व्यवस्था नहीं की गई, तो नागरिक नगर पंचायत कार्यालय का घेराव करेंगे। यह मुद्दा अब एक मानवीय संकट बन चुका है, जहां विकास की चकाचौंध के पीछे गंदगी का अंबार छिपा है।
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