घाटों पर आस्था का सैलाब, प्रशासन की कड़ी नजर:
मेला वर्तमान में सुचारू रूप से चल रहा है और नदी के विभिन्न घाटों पर सुबह से ही स्नानार्थियों का जमावड़ा लग रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए राप्ती नदी में बैरिकेडिंग को और दुरुस्त किया है। मेले में तैनात पुलिस बल लगातार गश्त कर रहा है ताकि अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति न बने। विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'एंटी रोमियो स्क्वाड' और महिला पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में तैनात किया गया है।
व्यापारिक सरगर्मियां तेज, पार्किंग बनी मुसीबत:
मेले के मुख्य बाज़ार में लकड़ी के फर्नीचर, हस्तशिल्प और कृषि यंत्रों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि इस साल मेले में व्यापार की स्थिति पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है। हालांकि, मेले के आसपास पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बांसी-इटवा मार्ग और बांसी-सिद्धार्थनगर मार्ग पर रह-रहकर जाम की स्थिति बन रही है। वाहनों की लंबी कतारों के कारण राहगीरों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
अस्थाई स्वास्थ्य शिविर की मांग:
मेले में आए श्रद्धालुओं ने शिकायत की है कि इतनी भारी भीड़ होने के बावजूद मेला परिसर में पर्याप्त प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था नहीं है। यदि कोई बच्चा या बुजुर्ग अचानक बीमार पड़ता है, तो उसे सीधे शहर के अस्पताल ले जाना पड़ता है, जो जाम के कारण समय ले सकता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मेले के शेष दिनों के लिए कम से कम दो अस्थाई चिकित्सा केंद्र और एम्बुलेंस की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
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