ब्यूरो रिपोर्ट, सिद्धार्थनगर (उत्तर प्रदेश)
22 मई 2026
सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर में इन दिनों डीजल और पेट्रोल का संकट लगातार गहराता जा रहा है। जिले के प्रमुख पेट्रोल पंपों पर ईंधन के लिए हाहाकार मचा हुआ है और तेल लेने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति किसानों की है, क्योंकि खेती-किसानी के इस बेहद महत्वपूर्ण समय में डीजल न मिलने से ग्रामीण इलाकों में काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
सड़कों पर लगीं गाड़ियों की लंबी कतारें, लगा जाम
ईंधन की किल्लत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पेट्रोल पंपों के बाहर मुख्य सड़कों पर ट्रैक्टर, पिकअप, टेंपो, कार और मोटरसाइकिलों की कई किलोमीटर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई जगहों पर सड़कों के दोनों ओर गाड़ियां खड़ी होने की वजह से जाम जैसी स्थिति बन गई है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच लोग घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं।
बांसी स्टैंड पेट्रोल पंप पर बेकाबू दिखे हालात
'बस्ती मण्डल न्यूज़' की टीम ने शुक्रवार को मुख्यालय स्थित बांसी स्टैंड के इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप का जमीनी मुआयना किया, जहाँ हालात पूरी तरह बेकाबू नजर आए। पेट्रोल पंप के बाहर ट्रैक्टरों और अन्य कमर्शियल वाहनों की लंबी लाइनें लगी थीं। बड़ी संख्या में किसान और आम लोग हाथों में गैलन और डिब्बे लेकर डीजल के लिए घंटों से धूप में खड़े दिखे। तेज धूप और उमस के कारण लोगों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर है और कई जगहों पर वाहन चालकों और पंप कर्मचारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिल रही है।
"रात 2 बजे से लाइन में हूँ..." – किसानों का दर्द फूटा
खेती का सीजन होने के कारण किसानों को इस संकट से सबसे बड़ी चोट पहुँच रही है। लाइन में लगे एक स्थानीय किसान रामविलास यादव ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया:
"मैं रात दो बजे से अपना ट्रैक्टर लेकर लाइन में लगा हुआ हूँ, लेकिन सुबह होने के बाद भी मेरा नंबर नहीं आया। आगे खेत की जुताई करनी है और धान की नर्सरी (बेहन) डालने की तैयारी चल रही है। अगर समय पर डीजल नहीं मिला, तो हमारी पूरी खेती पिछड़ जाएगी और मेहनत बर्बाद हो जाएगी।"
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
भीषण गर्मी में बिना किसी छांव और पानी की व्यवस्था के घंटों कतारों में खड़े लोग अब स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठा रहे हैं। जिले में अचानक पैदा हुए इस ईंधन संकट की क्या वजह है और आपूर्ति कब तक सामान्य होगी, इसे लेकर स्थिति अभी तक साफ़ नहीं हो पाई है। डीजल की यह किल्लत अगर जल्द दूर नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में आम जनता और किसानों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

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