बस्ती मंडल न्यूज़ | संवाददाता: रविंद्र भट्ट

बस्ती। जनपद में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने होटल और ढाबा उद्योग की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि नेशनल हाईवे के किनारे संचालित होने वाले लगभग 90 प्रतिशत ढाबों में ताले लटक गए हैं। गैस की अनुपलब्धता के कारण चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं, जिससे व्यापारी और कर्मचारी दोनों ही दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर हैं।

गैस की कमी से चूल्हे बुझे, ढाबा मालिकों की बढ़ी मुश्किलें

​स्थानीय ढाबा संचालकों के अनुसार, पिछले कई दिनों से बाजार में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति ठप है। बिना गैस के बड़े पैमाने पर खाना बनाना असंभव हो गया है। जो इक्का-दुक्का ढाबे अभी खुले भी हैं, वे सीमित संसाधनों के दम पर जैसे-तैसे काम चला रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि यदि 1-2 दिन में आपूर्ति सुचारु नहीं हुई, तो वे भी शटर गिराने को मजबूर होंगे।

कर्मचारियों पर बेरोजगारी की तलवार, आय के स्रोत बंद

​इस संकट का सबसे दर्दनाक पहलू इन ढाबों में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी हैं। ढाबा मालिकों का कहना है कि:

  • ​कारोबार पूरी तरह ठप होने से दैनिक आय बंद हो गई है।
  • ​कर्मचारियों को वेतन देना अब मुमकिन नहीं रह गया है।
  • ​सैकड़ों परिवार भुखमरी और बेरोजगारी के कगार पर पहुँच गए हैं।

ऑनलाइन फूड मार्केट भी हुआ 'क्रैश'

​गैस संकट का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल बाजार पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। स्थानीय संचालकों के मुताबिक:

  • ​ऑनलाइन फूड डिलीवरी के ऑर्डर में 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
  • ​होम डिलीवरी से जुड़े युवाओं की कमाई भी आधी से कम रह गई है।

व्यापारियों की प्रशासन से गुहार

​बस्ती के व्यापारियों और होटल संघ ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कमर्शियल गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए और आपूर्ति को तत्काल बहाल किया जाए। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट जिले की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचाएगा।